नशे का आतंक


कुछ समय पहले नशे की समस्या पर एक फिल्म आई थी ‘उड़ता पंजाब’। हांलाकि पंजाब में यह समस्या ज्यादा गंभीर नहीं है परन्तु नशे की यह भयंकर बिमारी अब पंजाब तक सीमित न रहकर पूरे देश में आग की तरह फैल गयी है, इसलिए इसका नाम ‘उड़ता भारत’ होता तो ज्यादा सटीक होता। हमारे भारतीय समाज में किसी भी प्रकार का नशा आपत्तिजनक रहा है। लेकिन अब तो नशों के भी इतने प्रकार प्रचलित हो गए हैं कि शराब जैसा नशा जो युवाओं के लिए छोटा-सा हो गया है। अफीम, चरस, हीरोइन जैसे खतरनाक नशे जिसकी एक बार लत लगने पर युवाओं की जवानी और जीवन पूरा बर्बाद हो जाता है, आजकल देश के हर नुक्कर-चैराहों पर उपलब्ध है।
नहीं मिल रहे शादी योग्य लड़के
कुछ दिन पहले हम पंजाब के भटिंडा जिले के एक काॅलेज के कार्यक्रम में गए हुए थे। कार्यक्रम के दौरान जब हम वहाँ के अध्यापकों से घुल-मिल गए तब हमें पता लगा कि काॅलेज में अधिकांश महिला अध्यापक ही थी, जो काफी उम्र की होते हुए भी शादीशुदा नहीं थी। कारण जानने पर ज्ञात हुआ कि उनको कोई सुयोग्य लड़के नहीं मिल पा रहे हैं क्योंकि यहाँ के अधिकांश लड़के नशे की लत में पड़ चुके हैं। एक सर्वे के अनुसार पंजाब के हर 4 में से 3 युवा, अथवा कहें तो लगभग हर घर में कोई न कोई इस महामारी का शिकार है।
मिट रहा है चरित्र और शौर्य
नशे में व्यक्ति स्वयं पर संयम नहीं रख पाता और यह विभिन्न अपराधों का मूल कारण बनता ह। वर्ष 2014 में मुम्बई में ड्रग्स के नशे के आदी एक व्यक्ति ने 10-12 वर्ष की तक़रीबन 15 लड़कियों का यौन शोषण किया। नशे की समस्या इतनी विकराल है कि ना सिर्फ व्यक्ति को बल्कि परिवार, समाज और देश को भी खा जाती है। वीरों की इस महान भूमि में जहाँ गुरू गोविन्द सिंह जी ने सवा लाख से एक लड़ने के लिए सक्षम बनाया था, आपको क्या लगता है, नशे में धुत्त ये नौजवान क्या सवा लाख मिलकर भी देश और धर्म की रक्षा के लिए किसी एक दुश्मन का भी सामना कर पाएंगे? तो नशे का यह सवाल व्यक्तिगत नहीं है अपितु हमारे देश और समाज के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है।
कोई भी नेता, पार्टी, सरकार इस पर काबू नहीं कर पा रही है। सवाल उठता है कि वे कौन लोग हैं या कौन सी ताकतें हैं जो भारत को नशे की लत से बर्बाद करना चाहती हैं। इसको समझने के लिए थोड़ा इतिहास खोजते हैं।
ईस्ट इंडिया कम्पनी: नशे के व्यापारी

ईस्ट इण्डिया कम्पनी, जो भारत में विभिन्न प्रकार के उत्पाद लेकर आई उसमे से एक था अफीम। इस अफीम को भारत के रास्ते चीन पहुँचाया जाता था। सन् 1830 में चीन 33% हिस्सेदारी के साथ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बन चुकी थी क्योंकि भारत की अर्थव्यस्था जो सन् 1700 में सबसे बड़ी थी उसको अंग्रेजों ने तोड़ दिया था। अब अंग्रेजों की निगाह चीन पर थी जिसे बर्बाद करने के लिए ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत के रास्ते से चीन में अफीम बेचना शुरू किया। देखते-देखते चीन की अर्थव्यस्था कमजोर होने लगी क्योंकि वहाँ के लोग अब नशे की लत में थे। यह देखते हुए वहाँ के शासक ने अफीम के व्यापार पर पाबन्दी लगाई जिसकी प्रतिक्रिया में इंग्लैण्ड ने चीन के साथ 1840 में युद्ध छेड़ दिया, जिसे अफीम युद्ध (Opium War) कहा जाता है और सन् 1900 तक चीन की अर्थव्यस्था 33% से गिरकर दुनिया की अर्थव्यस्था की 10% मात्र रह गयी।

इस तरह से चीन के बाद दुनिया के कई देशों को इस जाल में फंसा लिय जिसमें इंडोनेशिया, वियतनाम, थाईलैंड, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के अधिकाँश देश शामिल हैं।
बर्बाद होते किशोर

भारत में क्योंकि समाज काफी मजबूत था और नशे को लेकर सतर्क भी, इन लोगों के कुचक्र में नहीं फँसा। परन्तु जैसे-जैसे लोगों ने आजा़दी के नाम पर पश्चिमी संस्कृति का अनुकरण किया वैसे ही भारत में भी इसकी जड़े जमती चली गई। ये लोग स्कूल, काॅलेज और यूनिवर्सिटी जैसी जगहों को अपना अड्डा बनाते हैं जहाँ माता-पिता की देखरेख बिना नासमझ नौजवान इसका शिकार बन जाते हैं। एक सर्वे के अनुसार दिल्ली के 36% स्कूली बच्चे पार्टी में ड्रग्स लेते हैं। दिल्ली और मुम्बई जैसे बड़े शहरों में तो लड़कियाँ लड़कों से भी आगे हैं।

"भारत में ऐसे ड्रग्स का नशा प्रतिबंदित है, तो प्रश्न यह उठता है कि इतना मजबूत प्रशासन, पुलिस, एंटी-नारकोटिक्स (ड्रग्स विरोधी) विभाग होते हुए भी पंजाब के घर-घर तक और पूरे देश के लगभग सभी शहरों में यह मिलता कैसे है और यह आता कहाँ से है?"
मित्रों, हमारी पोस्ट आपको कैसी लगी हमें जरूर बतायें। यदि आपके पास कोई सुझाव हो तो जरूर दे। हम अगले पोस्ट में नशे के मास्टरमाइंड के बारे में बात करेंगे। साथ ही नशे के आतंक को कैसे रोका जा सकता है इस विषय पर भी बात करेंगे। फिलहास के लिए इतना ही। सतर्क रहें, जागरूक बनें।

Comments

Popular posts from this blog

ऋषि ऋण, देव ऋण, पितृ ऋण से बड़ा बैंक ऋण?