प्रिय देशवासियों के लिए संदेश


मेरे प्यारे देशवासियों, सदियों से विश्वगुरू और पुरी दुनिया के लिए आदर्श रहा हमारा देश, आज एक ऐसी परिस्थिति से गुजर रहा है, जिसमें मात्र इतिहास पर गर्व करने के अलावा शायद ही गर्व करने के लिए कुछ और बचा है। भारत के इस पतन के सच्चे कारणों को ना तो शिक्षा द्वारा, ना ही सरकारों द्वारा और ना ही मीडिया द्वारा बताया जाता है क्योंकि इन लोगों को सत्य बताने की इजाजत ही नहीं है।

आज के तमाम प्रिंट और इलेक्ट्राॅनिक मीडिया घटनाचार पर आधारित हैं और रोज सुबह-सुबह केवल यही बताते रहते हैं, कि किसने किसको मार दिया, कहाँ किसका बलात्कार हुआ, देश में कितना घोटाला हुआ, कहाँ आतंकवादी हमला हुआ इत्यादि। परन्तु कोई इन सब घटनाओं के पीछे चल रहे सच्चे कारणों तक नहीं पहुँचाता, समाधान की बात छोड़ ही दीजिए। यही कारण है कि लोकतंत्र के चैथे स्तंभ को लेकर अधिकतर लोगों की यही राय बन चुकी है कि मीडिया बिकाऊ है।
                             
सत्य से ताकतवर इस दुनिया में शायद ही कुछ है, गांधी जी कहते थे ‘‘सत्य ही ईश्वर है।’’ परन्तु आज पैसे और भूलभुलैया की व्यवस्था के द्वारा सत्य को लोगों से छुपा दिया गया है। उन्हें सिर्फ उतना ही बताया जाता है जितना कि गुलामों को जानना चाहिए। जो लोग सच बोलते हैं तथा उसे समाज में स्थापित करना चाहते हैं, ऐसे लोगों को सत्ता टिकने नहीं देती एवं नष्ट कर देती है।

इसलिए सच बोलने के लिए हिम्मत चाहिए।

 जब हम कुछ नौजवानों को सत्य की एक किरण दिखाई दी तो हमने उस किरण के स्रोत को खोजने का प्रयास किया, तब हमने पाया कि भारत की इस वर्तमान बदहाली का कारण कुछ और ही है।

हम कुछ नौजवानों ने भारतीय परिवार बनाकर स्वयं तो हर कदम सत्य की ओर बढ़ाने का फैसला किया ही, साथ ही भारतीय परिवार के माध्यम से भारत के प्रत्येक व्यक्ति को सत्य के इस प्रकाश पुंज तक पहुँचाना चाहते हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि सच जाग गया तो समझो भारत जाग गया।


भारतीय परिवार का यह वैचारिक संवाद महीने में दो बार आप तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा। आपसे आशा है कि सत्य के इस प्रयोग को आगे बढ़ाने के लिए आप हमारे परिवार का सदस्य बनकर हमें न्यूनतम 100 रू0 से अधिकतम आपकी इक्षानुसार दान देकर परिवार को मजबूत बनाऐंगे।

मित्रों, आप हमें अपनी राय अवश्य दें। अधिक जानकारी के लिए हमसे सम्पर्क करें। 

मोबाइल नं0 8745026277 एवं 7631518758
ईमेल bhartiyparivar@gmail.com

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